उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के एक वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। 27 जनवरी को इसकी पहली वर्षगांठ होगी। यूसीसी ने महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता के साथ-साथ प्रक्रियाओं के सरलीकरण में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि एक साल से भी कम समय में प्रदेश में 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है।
यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। अब पति-पत्नी और गवाह कहीं से भी रिकॉर्ड व वीडियो बयान के माध्यम से पंजीकरण करवा सकते हैं। पहले ऑफलाइन व्यवस्था में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर दो गवाहों के साथ उपस्थित होना अनिवार्य था। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 67 थी।
यूसीसी के तहत औसतन पांच दिन में विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी हो रहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से विवाह विच्छेद, लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण और समाप्ति के प्रमाणपत्र भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता देश के लिए एक मॉडल कानून बनकर उभरी है, जिससे पारदर्शिता और जनविश्वास दोनों बढ़े हैं।
उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए, अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैँ। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
Reported By: Rajesh Sharma












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