उत्तराखंड में एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2026 के तहत नदियों और जलस्रोतों के आसपास रहने वाले पक्षियों की गणना का कार्य 18 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण के अंतर्गत कॉर्बेट लैंडस्केप से होकर बहने वाली कोसी नदी में भी जलपक्षियों की गिनती की जाएगी। यह वार्षिक सेंसस स्थानीय और शीतकालीन प्रवास पर आने वाले प्रवासी पक्षियों की स्थिति को समझने के लिए बेहद अहम माना जाता है।
एशियन वाटरबर्ड सेंसस के तहत विशेषज्ञों और पक्षी प्रेमियों की टीमें नदियों, झीलों और आर्द्रभूमि क्षेत्रों में जाकर विभिन्न प्रजातियों की पहचान और उनकी संख्या दर्ज करती हैं। इससे यह आकलन किया जाता है कि पर्यावरणीय परिस्थितियां पक्षियों के लिए कितनी अनुकूल हैं और संरक्षण के लिए किन उपायों की आवश्यकता है।
पक्षी प्रेमी दीप मलकानी ने बताया कि वे हर वर्ष इस गणना में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनके अनुसार वर्ष 2025 की गणना में कोसी नदी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रजातियां दर्ज की गई थीं, जिनमें 422 रूडी शेलडक, 15 ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, 2 कॉमन सैंडपाइपर, 2 कॉमन ग्रीनशैंक, 2 वूली नेक्ड स्टॉर्क, 53 लिटिल कॉर्मोरेंट, 36 ग्रेट कॉर्मोरेंट, 15 लिटिल ईग्रेट और 3 ग्रेट बर्ड शामिल हैं।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि कोसी नदी और आसपास का क्षेत्र जलपक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास बना हुआ है। इसी कारण इस वर्ष भी 18 जनवरी से यहां एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2026 के तहत पक्षियों की गणना की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियमित सर्वेक्षण जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दीप मलकानी,
पक्षी प्रेमी व गड़ना में शामिल होने वाले एक्सपर्ट
Reported By: Rajesh Kumar












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