मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन की सशक्त मिसाल बनकर उभरा है। यह पहल केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि शासन को सीधे आमजन तक पहुँचाने की प्रभावी कार्यशैली के रूप में स्थापित हुई है।
इस अभियान के तहत सरकार ने सुनिश्चित किया है कि जनकल्याणकारी योजनाएँ दूरस्थ, पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों तक वास्तविक रूप से पहुँचें। विभिन्न विभागों के अधिकारी स्वयं क्षेत्रों में पहुँचकर जनसमस्याओं का मौके पर समाधान कर रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। लाभार्थियों की रिकॉर्ड भागीदारी यह दर्शाती है कि शासन अब अधिक सक्रिय और जवाबदेह बना है।
कार्यक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता को भी मजबूती दी है। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जनता का विश्वास बढ़ा है। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं के लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का लक्ष्य इस अभियान की मूल भावना है।
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अब प्रदेश में सेवा और विकास की सतत परंपरा स्थापित कर रहा है, जो प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम कर उत्तराखंड को अधिक जनकेंद्रित और प्रगतिशील राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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