देहरादून: हिमालयी राज्य उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने दस्तक दे दी है। ऊँचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी की संभावना और मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सरकार ने शीत लहर से निपटने के लिए मार्च तक की विस्तृत रणनीति तैयार कर ली है।
बर्फबारी और पाले का दोहरी मार
वर्तमान में प्रदेश के हालात दो तरह की चुनौतियों पेश कर रहे हैं:
पहाड़ों में पाला: चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जैसे ऊंचाई वाले जिलों में पाले ने जनजीवन प्रभावित किया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो चुका है।
मैदानों में कोहरा: हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में घना कोहरा यातायात और सामान्य जीवन में मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
स्नो डेस्टिनेशन पर नजर
मसूरी, औली, नैनीताल, कौसानी, चोपता, धनोल्टी, मुनस्यारी और चकराता जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हालांकि अभी तक उम्मीद के मुताबिक भारी बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन विभाग आने वाले दिनों के लिए पूरी तरह तैयार है ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को असुविधा न हो।
आपदा प्रबंधन विभाग की रणनीति (मार्च तक का प्लान)
आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभाग पिछले एक महीने से लगातार तैयारियों में जुटा है। मुख्य रणनीतिक बिंदु निम्नलिखित हैं:
निरंतर समन्वय: जिला प्रशासन के साथ सचिवालय स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
बैठकों का दौर: एसीओ (ACO) स्तर से लेकर मुख्य सचिव स्तर तक की बैठकों में सभी जिलों को स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जा चुकी हैं।
संसाधनों की तैनाती: बर्फबारी के कारण बंद होने वाले मार्गों को खोलने के लिए मशीनों और जनशक्ति की प्री-डिप्लॉयमेंट सुनिश्चित की गई है।
जिला प्रशासन को निर्देश
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि:
बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों और अलाव की उचित व्यवस्था की जाए।
पाले और कोहरे के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम हों।
आवश्यक वस्तुओं (खाद्यान्न, दवाइयां) का स्टॉक दुर्गम क्षेत्रों में पहले से सुरक्षित रखा जाए।
मुख्य स्नो डेस्टिनेशन जहाँ अलर्ट जारी:
चमोली: औली, बद्रीनाथ।
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ, चोपता।
देहरादून: चकराता, मसूरी।
उत्तरकाशी: गंगोत्री, हर्षिल।
पिथौरागढ़: मुनस्यारी।
Reported By: Arun Sharma












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