मूड और भूख के बीच गहरा संबंध होता है। डिप्रेशन में कुछ लोगों की भूख काफी कम हो सकती है। खाना बेस्वाद लग सकता है, खाने की इच्छा नहीं होती या व्यक्ति खाना खाना ही भूल सकता है। वहीं कुछ लोगों में इसके बिल्कुल विपरीत स्थिति देखने को मिलती है। उन्हें खासतौर पर मीठे या अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन की तीव्र इच्छा हो सकती है।
मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों में इंटरल्यूकिन-6 (IL-6) और ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर-अल्फा (TNF-alpha) जैसे सूजन से जुड़े संकेतकों के स्तर में बदलाव पाया गया है। कुछ लोगों में डिप्रेशन के दौरान शरीर में सामान्य से अलग सूजन संबंधी प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं। लगातार अस्वस्थ महसूस करना, ऊर्जा की कमी या बार-बार बीमार पड़ना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है।
मस्तिष्क और आंत के बीच लगातार संपर्क रहता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। तनाव और मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव पाचन तंत्र के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। डिप्रेशन या लंबे समय तक रहने वाला तनाव कुछ लोगों में पेट फूलना, कब्ज, दस्त, मतली और पेट में असहजता जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।