आज पूरी दुनिया विश्व मानवता दिवस मना रही है। यह दिन उन नायकों की स्मृति और सम्मान का प्रतीक है, जो संकट के समय अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद करते हैं। भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” हमें याद दिलाता है कि पूरी धरती एक परिवार है और मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
मानवता दिवस करुणा, सेवा और एकता के मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान है। करुणा हमें दूसरों के दुख को अपना मानने की प्रेरणा देती है, सेवा हमें कर्म के माध्यम से समाज का सहारा बनना सिखाती है और एकता हमें सीमाओं व धर्मों से परे एक साझा परिवार की तरह जीने का संदेश देती है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि मानवता दिवस हमें झकझोरता है कि हम छोटी-छोटी सेवाओं से भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं—किसी भूखे को भोजन देना, निराश को सहारा देना या आपदा पीड़ितों की मदद करना, यही सच्ची मानवता है। उन्होंने कहा कि प्रेम और करुणा ही वह शक्ति है जो अंधकार को प्रकाश में बदल सकती है।
आज जब दुनिया हिंसा, युद्ध और जलवायु संकट से जूझ रही है, तब मानवता ही वह प्रकाश है जो दिशा दिखा सकती है। विशेषकर युवाओं के लिए यह दिन एक संकल्प है कि वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज और पृथ्वी के लिए जिएँगे।
आइए, हम सब मिलकर करुणा और सेवा की मशाल जलाएँ और इस अंधकारमय समय में प्रकाश बनें—यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे मूल्यवान उपहार है।
Reported By: Arun Sharma












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