
उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्राथमिक एवं औपबंधिक शिक्षकों की विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने शिक्षकों की मांगों से संबंधित ज्ञापन भेजकर टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने सहित नौ प्रमुख मांगें उठाई हैं।
संघ का कहना है कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं के कारण उनके सेवा हितों, पदोन्नति, वेतन विसंगतियों और प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ रहा है। इसका प्रभाव प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
संघ ने मांग की है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त प्राथमिक एवं औपबंधिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी नियुक्तियों और सेवाओं को विधिसम्मत मानते हुए सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षकों को अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने और औपबंधिक शिक्षकों को नियमित सेवा लाभ देने की मांग भी की गई है। संघ ने शासनादेश के अनुसार सेवानिवृत्ति से पहले न्यूनतम तीन पदोन्नतियों अथवा उनके समकक्ष एसीपी का लाभ देने की मांग उठाई है।
इसके अलावा शिक्षकों के स्थानांतरण, गोल्डन कार्ड की विसंगतियों के समाधान और वर्ष 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों को ओपीएस के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। संघ ने वर्षों से कार्यरत शिक्षा मित्रों को नियमित किए
जाने का मुद्दा भी उठाया है।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। साथ ही शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक वार्ता आयोजित कर लंबित समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
धर्मेंद्र रावत, प्रदेश अध्यक्ष शिक्षक संघ
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Reported By: Shiv narayan













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