औली बचाओ मुहिम: -9 डिग्री की हाड़ कंपाने वाली ठंड में 72 घंटे से धरना जारी, अब अनशन की तैयारी
ज्योर्तिमठ (औली): उत्तराखंड के प्रसिद्ध विंटर डेस्टिनेशन और स्नो स्कीइंग की राजधानी औली को बचाने के लिए स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। भीषण ठंड और शून्य से 9 डिग्री नीचे (-9°C) के तापमान के बावजूद, पर्यटन हितधारकों का धरना आज तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अब आमरण अनशन शुरू करेंगे।
क्या हैं आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांगें?
स्थानीय कारोबारी विवेक पंवार, अंशुमन बिष्ट और अन्य प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने दो सूत्रीय मांगें रखी हैं:
आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम: 15 साल पहले दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों के लिए यूरोप से करोड़ों की लागत से मंगाई गई मशीनों को दुरुस्त कर कृत्रिम बर्फ बनाना शुरू किया जाए।
आइस स्केटिंग रिंक: साल 2019 में उद्घाटन के बाद से ही बदहाल पड़े ओपन आइस स्केटिंग रिंक को तत्काल सुचारू किया जाए।
करोड़ों के बजट और ‘कबाड़’ सिस्टम की जांच की मांग
आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्नो मेकिंग सिस्टम के मेंटेनेंस के नाम पर बजट की बर्बादी की गई है, जबकि धरातल पर मशीनें कबाड़ हो चुकी हैं। उन्होंने मांग की है कि अधूरे आइस स्केटिंग रिंक का उद्घाटन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच हो और इस पूरे सिस्टम की खरीद-फरोख्त की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए।
मिल रहा है भारी जन समर्थन
धरना स्थल पर पहुंचकर कई जन प्रतिनिधियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है:
अनूप नेगी (ब्लॉक प्रमुख) और देवेश्वरी शाह (चेयरमैन नगर परिषद): इन्होंने कारोबारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
नैन सिंह भंडारी (व्यापार मंडल अध्यक्ष): व्यापार मंडल ने भी इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का भरोसा दिया है।
लखपत बुटोला (विधायक, बद्रीनाथ): विधायक ने अपना समर्थन जताते हुए कहा कि वे इस गंभीर मामले को शासन के सम्मुख प्रमुखता से उठाएंगे।
कल से नई रणनीति: चक्का जाम और तालाबंदी की सुगबुगाहट
आंदोलनकारियों के अनुसार, तीन दिन का अल्टीमेटम आज शाम समाप्त हो रहा है। कल से आंदोलन को नया रूप देने के लिए टैक्सी यूनियन, व्यापार मंडल और चेयर लिफ्ट प्रबंधन के साथ बैठक कर नई रणनीति तैयार की जाएगी। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि औली का अस्तित्व खतरे में है और जब तक मशीनें नहीं चलेंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
Reported By: Rajesh Kumar














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