
एम्स ऋषिकेश के एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग की ओर से सर्जिकल देखभाल के दौरान मरीजों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को एनेस्थीसिया की भूमिका, सर्जरी के विभिन्न चरणों में मरीज की सुरक्षा और इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि सर्जरी के दौरान मरीज को सुरक्षित रखना और उसके महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों की निगरानी करना एनेस्थीसिया चिकित्सकों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
संस्थान के ओपीडी क्षेत्र में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका केवल मरीज को बेहोश करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और उसके बाद तक मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि एनेस्थीसिया चिकित्सक सर्जरी से पहले मरीज की विभिन्न जांचों, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के आकलन और उसे मानसिक रूप से तैयार करने का कार्य करते हैं। वहीं, सर्जरी के दौरान सुरक्षित एनेस्थीसिया देने, जीवनरक्षक प्रणालियों की निगरानी, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और सर्जरी के बाद मरीज को होश में लाने के साथ दर्द प्रबंधन की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
एनेस्थीसिया चिकित्सा व्यवस्था की मुख्यधारा का हिस्सा: प्रो. मीनू सिंह
विभाग की ओर से आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और पेरिफेरल सेवाओं में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनेस्थीसिया को पर्दे के पीछे काम करने वाली शाखा मानना उचित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ शाखा है।
इस अवसर पर विभाग के प्रो. अंकित अग्रवाल ने वर्ष 2013 में विभाग की स्थापना से लेकर अब तक की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रो. संजय अग्रवाल ने विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में स्टोन पेंटिंग, रील मेकिंग और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं के साथ क्विज एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत धमीजा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
स्कूली विद्यार्थियों को दिया सीपीआर का प्रशिक्षण
जनजागरूकता अभियान के तहत एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग की ओर से रेड फोर्ट स्कूल के विद्यार्थियों के लिए हैंड्स-ऑन सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने वाली प्राथमिक सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और विद्यार्थियों को आवश्यक कौशल से परिचित कराना था।
Reported By: Arun Sharma













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