भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लास बीते दिन तीर्थनगरी ऋषिकेश में अपने चरम पर दिखा। नरेंद्रनगर राजदरबार से शुरू हुई पावन गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा आज ऋषिकेश पहुंची। इस वर्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार चेला चेतराम धर्मशाला जाने के बजाय, यह यात्रा पहली बार बनखंडी स्थित रामलीला ग्राउंड पहुंची है।
सुबह से ही बनखंडी क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जैसे ही गाडू घड़ा रामलीला ग्राउंड पहुंचा, पूरा क्षेत्र बद्री विशाल लाल की जय के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। हजारों भक्तों ने कतारबद्ध होकर चांदी के कलश के दर्शन किए और पुण्य अर्जित किया। स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ भारी संख्या में देश-विदेश से आए तीर्थयात्री और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस दिव्य यात्रा के साक्षी बने। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद भी कलश यात्रा में पहुंचे।
यहां से विभिन्न पड़ावों और पहाड़ के रास्तों से होते हुए यात्रा बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। यह यात्रा उत्तराखंड की संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक है। बता दे कि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले राजमहल की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तिल का तेल निकालती हैं। इसी तेल को चांदी के कलश गाडू घड़ा में भरकर धाम ले जाया जाता है, जिससे भगवान बद्रीनाथ का अभिषेक होता है।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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