आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों का आकलन किया गया और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
एनडीएमए के सदस्य कृष्णा एस वत्स ने कहा कि चारधाम यात्रा राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने रूट आधारित जोखिम आकलन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई (एंटीसिपेटरी एक्शन) पर जोर दिया। साथ ही यात्रियों तक समय पर अलर्ट पहुंचाने और धामों की कैरिंग कैपेसिटी का ध्यान रखने के निर्देश दिए।
अभ्यास के दौरान क्राउड और ट्रैफिक मैनेजमेंट, रियल टाइम मॉनिटरिंग, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और हेली सेवाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया। मोबाइल हेल्थ यूनिट्स बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों जैसे एआई/एमएल के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया।
सचिव एनडीएमए मनीष भारद्वाज ने उत्तराखण्ड की तैयारियों की सराहना करते हुए ‘शून्य मृत्यु’ लक्ष्य के साथ सभी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने यात्रियों के मोबाइल में चेतावनी एप डाउनलोड कराने पर भी जोर दिया।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि ऐसे मॉक अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयारियों को परखने का प्रभावी माध्यम हैं। काल्पनिक आपदा परिदृश्यों के आधार पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों के उपयोग का परीक्षण किया गया।
इस अभ्यास से स्पष्ट हुआ कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित और निर्विघ्न बनाने के लिए राज्य स्तर पर तैयारियां लगातार मजबूत की जा रही हैं।













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