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जन प्रहार ने पिटकुल (PTCUL) के प्रबंध निदेशक पद को लेकर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 18 फरवरी 2026 को एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जन प्रहार के अनुसार 27 फरवरी को अदालत में अवमानना की सुनवाई के दौरान भी सरकार से पूछा गया कि नियुक्ति निरस्त होने के बाद अधिकारी को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया। वहीं बाद में जारी आदेश में तारीख 26 फरवरी दर्ज होने से संदेह और बढ़ गया है।
संगठन का आरोप है कि अब पिटकुल, UPCL और UJVNL के प्रबंध निदेशक व निदेशक पदों के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं और नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। आशंका जताई जा रही है कि पात्रता शर्तों में बदलाव कर किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
जन प्रहार ने सरकार से सभी आदेश सार्वजनिक करने, नियमों में बदलाव की प्रक्रिया स्पष्ट करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
केस में पक्षकार दीप्ति पोखरियाल
सुजाता पॉल
पंकज सिंह क्षेत्री (एडवोकेट)












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