भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन पत्र सूचना कार्यालय (PIB), देहरादून द्वारा आयोजित एक विशेष ‘मीडिया अध्ययन टूर’ के तहत उत्तराखंड के 13 वरिष्ठ पत्रकारों के एक दल ने ओडिशा स्थित विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक विनिमय, विरासत संरक्षण और भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों से मीडिया कर्मियों को रूबरू कराना था।
सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक सेतु इस भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने कोणार्क मंदिर की अद्वितीय कलिंग स्थापत्य शैली और खगोलीय शुद्धता का बारीकी से अध्ययन किया। दल ने पाया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित कटारमल सूर्य मंदिर और ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर के बीच एक गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध है। जहाँ कटारमल हिमालय की गोद में मौन साधना और कत्यूरी शिल्प का प्रतीक है, वहीं कोणार्क समुद्र के तट पर विशालता और समय गणना (Sun Dial) की वैज्ञानिक पद्धति का अद्भुत उदाहरण पेश करता है।
अधिकारियों का मार्गदर्शन इस अध्ययन दौरे का नेतृत्व पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल ने किया। उनके साथ भारत सरकार की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन PIB के असिस्टेंट डायरेक्टर है महेंद्र प्रसाद जेना भी उपस्थित रहे, जिन्होंने मंदिर के ऐतिहासिक महत्व और इसके जीर्णोद्धार के प्रयासों के बारे में दल को विस्तृत जानकारी दी। श्री संजीव सुंदरियाल ने बताया कि ऐसे दौरों से देश के विभिन्न हिस्सों की विकास गाथाओं और सांस्कृतिक विरासतों को समझने में मीडिया की भूमिका सशक्त होती है।
दौरे के मुख्य बिंदु:
वैज्ञानिक विश्लेषण: पत्रकारों ने कोणार्क के पहियों (चक्रों) द्वारा छाया के माध्यम से समय की सटीक गणना करने की तकनीक को समझा।
सांस्कृतिक एकता: यह दौरा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को चरितार्थ करता है, जहाँ देवभूमि उत्तराखंड के पत्रकारों ने उत्कल की भूमि पर भारतीय मेधा के दर्शन किए।
मीडिया संवाद: पीआईबी ओडिशा और पीआईबी देहरादून के अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी सार्थक चर्चा हुई।
निष्कर्ष भ्रमण के उपरांत पत्रकारों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कोणार्क और कटारमल जैसे स्थल भारत की उस प्राचीन चेतना के प्रतीक हैं, जिसने प्रकृति, विज्ञान और अध्यात्म को एक सूत्र में बांधा है। यह दौरा न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसने क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद भारत की एक अखंड सांस्कृतिक पहचान को भी रेखांकित किया।
Reported By: Shishpal Gusain












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