विजय दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने दिव्य गंगा आरती देश के वीर जवानों को समर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक वेतन के लिए नहीं, बल्कि वतन के लिए लड़ते हैं और उनका जीवन त्याग, तपस्या व राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण है।
स्वामी जी ने उत्तराखंड को सैनिकों की भूमि बताते हुए कहा कि यहां लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना से जुड़ा रहा है। 1971 का युद्ध भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जिसने भारत की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय एकता और अदम्य साहस को विश्व पटल पर स्थापित किया। इस युद्ध में भारतीय सेनाओं के अद्भुत समन्वय से ऐतिहासिक विजय प्राप्त हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ।
उन्होंने कहा कि विजय दिवस हमें अपने शहीदों के बलिदान को स्मरण करने, सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। परमार्थ निकेतन ने इस अवसर पर 1971 के युद्ध में शहीद हुए वीर सपूतों को नमन करते हुए पूर्व व सेवारत सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया तथा युवाओं से राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
Reported By: Arun Sharma












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