यह एपिसोड केवल एक डूबे हुए शहर की कहानी नहीं सुनाता,
बल्कि उन स्मृतियों की यात्रा है,
जो पानी के नीचे चली गईं, पर लोगों के हृदय से कभी नहीं डूबीं।
भागीरथी और भिलंगना के पवित्र संगम पर बसा टिहरी नगर
सिर्फ एक राजधानी नहीं था—
वह राजशाही गरिमा, लोकजीवन की आत्मीयता
और सामाजिक समरसता की जीवित पहचान था।
यहाँ की होली रंगों से अधिक रिश्तों की थी,
दरबार से लेकर आम चौक तक
एक ही स्वर में गूंजती थी अपनत्व की फाग।
फिर समय बदला।
टिहरी बाँध के साथ विकास की नई धारा आई,
लेकिन उसी धारा ने हजारों घरों, आँगनों और यादों को
विस्थापन की पीड़ा में बहा दिया।
एक जीवंत शहर इतिहास बन गया—
और उसकी होली स्मृतियों में सिमट गई।
यह वीडियो डूबी हुई टिहरी की उसी होली को याद करता है—
उन परंपराओं को, उन गीतों को,
और उन भावनाओं को,
जो आज भी लोगों की चेतना में
रंग नहीं, आँसू बनकर जीवित हैं।
Reported By: Arun Sharma












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