अगर हम पक्षियों को समझ लें, तो प्रकृति को समझना आसान हो जाता है यह बात भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली ने कभी कही थी,आज उन्हीं की जयंती पर वाइल्डलाइफ आर्ट गैलरी रिंगोड़ा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बच्चों ने प्रकृति और पक्षियों से जुड़ाव का अनुभव किया।
पक्षी विशेषज्ञ संजय छिम्वाल ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. सलीम अली भारत में पक्षियों के अध्ययन और संरक्षण में अपने महान योगदान के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं, उन्हें बर्डमैन ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता है,डॉ. अली का जन्म 12 नवंबर, 1896 को हुआ था। वे ऐसे पहले भारतीय थे जिन्होंने देश में व्यवस्थित पक्षी सर्वेक्षण की शुरुआत की थी।
संजय छिम्वाल ने बताया कि बचपन में एक छोटी-सी घटना ने डॉ. सलीम अली का जीवन बदल दिया था, जब वे केवल दस साल के थे, उनके चाचा ने उन्हें एक एयरगन उपहार में दी थी, एक दिन उन्होंने एक गौरैया का शिकार किया, जिसकी गर्दन के नीचे पीली धारियां थीं।
पक्षी की पहचान जानने के लिए वे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) गए, जहाँ मानद सचिव डब्ल्यू.एस. मिलार्ड ने बताया कि वह पीले गले वाली गौरैया है। यहीं से सलीम अली की रुचि पक्षियों की दुनिया में बढ़ी और उन्होंने इस क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उनके इसी योगदान के सम्मान में हर वर्ष उनकी जयंती पर देशभर में पक्षी दिवस और नेचर अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।
रामनगर के वाइल्डलाइफ आर्ट गैलरी रिंगोड़ा में आज स्कूली बच्चों को प्रकृति भ्रमण और पक्षी अवलोकन कराया गया, बच्चों ने दूरबीन से विभिन्न पक्षियों का अवलोकन किया और उनके बारे में रोचक जानकारियाँ सीखीं।
इस मौके पर विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि जंगलों और नदियों के आसपास पाए जाने वाले पक्षी हमारे पर्यावरण संतुलन में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
बच्चों ने पक्षियों की आवाज़ें सुनने और उनकी पहचान करने की कला भी सीखी।
संजय छिम्वाल ने कहा कि डॉ. सलीम अली की तरह हमें भी पक्षियों और प्रकृति से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि यही हमारे अस्तित्व की नींव हैं।
संजय छिम्वाल, पक्षी प्रेमी
Reported By: Praveen Bhardwaj












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