देहरादून: ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ यानी वीबी-जी राम (VB-GRAM) योजना को लेकर उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ कांग्रेस इस योजना को महात्मा गांधी के नाम का अपमान और ग्रामीण अधिकारों का हनन बता रही है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के इतिहास को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा का तीखा हमला: “कांग्रेस ने गांधी जी को सिर्फ हार के डर से याद किया”
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर ने कांग्रेस की मंशा पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
नाम में बदलाव का इतिहास: मनरेगा योजना की शुरुआत में महात्मा गांधी का नाम नहीं था। यहाँ तक कि वर्ष 2003 में जब योजना का नाम बदला गया, तब भी कांग्रेस को गांधी जी याद नहीं आए।
हार का डर: नवीन ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि 2014 के चुनावों में जब कांग्रेस को अपनी हार सुनिश्चित दिखी, तब राजनीतिक लाभ के लिए आनन-फानन में योजना के साथ महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया।
गांधी बनाम परिवार: भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश में 600 से अधिक संस्थानों के नाम सिर्फ जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर रखे, उस समय उन्होंने महात्मा गांधी की उपेक्षा की।
“विरोध भाजपा से नहीं, आम जनता से है”
नवीन ठाकुर ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार ‘वीबी-जी राम’ योजना को नए कलेवर, आधुनिक सुविधाओं और ग्रामीण विकास के व्यापक लक्ष्यों के साथ लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह विरोध भाजपा के खिलाफ नहीं बल्कि उन ग्रामीणों के खिलाफ है जिन्हें इस योजना से सीधा लाभ होने वाला है।
कांग्रेस का रुख
बता दें कि कांग्रेस लगातार यह आरोप लगा रही है कि भाजपा सरकार ग्रामीण विकास के ढांचे को कमजोर कर रही है और पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर गांधी जी की विरासत को मिटाने का प्रयास कर रही है।
मुख्य विवाद के बिंदु:
| पक्ष | कांग्रेस का आरोप | भाजपा का पलटवार |
| नामकरण | गांधी जी का अपमान हो रहा है। | 2003 तक कांग्रेस ने नाम क्यों नहीं जोड़ा? |
| संस्थान | ग्रामीण अधिकार छीने जा रहे हैं। | 600+ संस्थान सिर्फ एक ही परिवार के नाम पर क्यों? |
| उद्देश्य | योजना का स्वरूप बिगाड़ना। | नई सुविधाओं के साथ ग्रामीण विकास को नई दिशा देना।
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Reported By: Arun Sharma














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