मां गंगा के पावन तट पर परमार्थ निकेतन में आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर का समापन हुआ। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य सान्निध्य में यह शिविर मानवता, करुणा और वैश्विक एकता का अद्भुत संगम बन गया।
शिविर में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और नेपाल सहित कई देशों से आए वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों ने सेवा की। एक हजार से अधिक रोगियों की नेत्र जांच और 264 मोतियाबिंद ऑपरेशन निःशुल्क सम्पन्न हुए। रोगियों को विजन टेस्टिंग, दवाइयां, आवास और भोजन की सुविधा भी प्रदान की गई।
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि सेवा ही साधना है और किसी की दृष्टि लौटाने से केवल आंखें ही नहीं, बल्कि विश्वास, आशा और भविष्य भी लौटते हैं। ऑस्ट्रेलिया से आई डॉ. पूर्णिमा राय ने कहा कि मां गंगा के तट पर सेवा का अनुभव उनके जीवन का सबसे पवित्र और अविस्मरणीय अनुभव रहा।
स्वयंसेवक और चिकित्सकों की टीम ने मिलकर रोगियों को शारीरिक उपचार के साथ-साथ मनोबल और आत्मविश्वास भी दिया। शिविर ने नेत्रदान ही नहीं, बल्कि आशा और मानवता का संदेश भी प्रसारित किया।
Reported By: Arun Sharma












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