केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच गुरुवार को तिमली-बड़मा मोटर मार्ग पर बड़ा भूस्खलन हो गया। अचानक पहाड़ी का विशाल हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा, जिससे भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर पूरे मार्ग पर फैल गए। घटना के बाद सड़क पूरी तरह बंद हो गई और करीब 80 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से प्रभावित हो गया।
मार्ग बंद होने से ग्रामीणों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, छात्रों के स्कूल-कॉलेज आने-जाने और किसानों की उपज बाजार तक पहुंचाने में गंभीर परेशानी उत्पन्न हो गई है। कई ग्रामीणों को लंबी दूरी पैदल तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर भूस्खलन हुआ है, वह वर्ष 2013 की आपदा के बाद से लगातार संवेदनशील बना हुआ है। हर मानसून में यहां पहाड़ी दरकने से सड़क कई दिनों तक बंद रहती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
लोक निर्माण विभाग ने इस भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र के स्थायी उपचार के लिए करीब 26 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेज रखा है। हालांकि स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यह योजना लंबे समय से लंबित है, जिससे हर वर्ष बरसात के दौरान यही स्थिति दोहराई जाती है।
भूस्खलन की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया। हालांकि लगातार बारिश और ऊपर से गिर रहे पत्थरों के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है। विभाग का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही मार्ग को जल्द से जल्द यातायात के लिए सुचारु करने का प्रयास किया जाएगा।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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