उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यमुना व दून घाटी में प्रस्तावित सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लगभग 7 हजार पेडों के कटान से पर्यावरण, वन्यजीवों सहित प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल हाइवे एथॉरिटी, जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग, राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट की खंडपीठ ने 3 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
गौर तलब है कि देहरादून की समाजसेवी रेनू पाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि यमुना व दून घाटी में आशारोडी व झाझरा के बीच गतिमान ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण के लिए लगभग 7 हजार पेडों का कटान किया जाना प्रस्तावित है। याचिका में कहा गया है कि ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत गतिमान सड़क निर्माण से पहले उत्तराखंड बायोडेविटी बोर्ड से कोई अनुमति नही ली गई है। बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण के साथ ही वन्यजीवों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। क्योंकि इन जंगलों में बर्ड की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है।
अभिजय नेंगी, अधिवक्ता हाईकोर्ट
Reported By: Praveen Bhardwaj













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