मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून जनपद के सेलाकुई स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि हाई वैल्यू फसलों के उत्पादन और उनके प्रसंस्करण से प्रदेश के किसानों की आर्थिकी में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने सगन्ध पौधा केन्द्र को और मजबूत करने तथा प्रदेशभर में इसकी गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किसानों को डोर-स्टेप सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने सभी जनपदों में जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप एरोमैटिक फसलों का चयन कर अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने की बात कही। साथ ही सगन्ध फसलों के उत्पादन में किसानों को तकनीकी एवं अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किए जा रहे सैटेलाइट सेंटर्स को शीघ्र प्रारंभ करने तथा परफ्यूमरी एवं एरोमैटिक सेक्टर में उच्च शिक्षा, कौशल विकास के अंतर्गत डिप्लोमा और सर्टिफिकेशन कार्यक्रम संचालित करने पर भी जोर दिया। मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में नियमित भ्रमण कर योजनाओं की समीक्षा और फीडबैक लेने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सगन्ध पौधा केन्द्र के निदेशक डॉ. निर्पेंद्र चौहान ने बताया कि केन्द्र को खुशबूदार फसलों के वाणिज्यीकरण के लिए एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जहां एक ही छत के नीचे खेती से लेकर प्रोसेसिंग, डिस्टिलेशन, मार्केटिंग, क्वालिटी एनालिसिस और प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि 5 नाली तक के किसानों को मुफ्त रोपण सामग्री दी जा रही है तथा 9 एरोमैटिक फसलों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
डॉ. चौहान ने जानकारी दी कि डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रायर के लिए पर्वतीय जनपदों में 75 प्रतिशत और मैदानी जनपदों में 50 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख रुपये) तक सब्सिडी उपलब्ध है। साथ ही किसानों के हित में 27 एसेंशियल ऑयल और एरोमैटिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्धारित किया गया है।
Reported By: Rajesh Sharma












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