
मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY) तथा मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MBADP) की अनुवीक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पलायन रोकथाम और सीमांत क्षेत्रों में रोजगार व आजीविका से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर गैप न रहे। जनपदों से आने वाले प्रस्तावों के अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज़ रखते हुए निर्धारित टाइमलाइन में कार्य पूर्ण किए जाएं। पुराने क्रियान्वयनों की समीक्षा करते हुए योजनाओं से धरातली आउटकम सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
टारगेटेड अप्रोच व संसाधन-आधारित इंटरवेंशन पर बल
मुख्य सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन में टारगेटेड अप्रोच और प्रभावी इंटरवेंशन अपनाने के निर्देश दिए ताकि अपेक्षित परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में MPRY और MBADP संचालित हैं, वे स्वरोजगार व आजीविका के मामलों में अन्य सीमांत गांवों के लिए प्रेरणादायी मॉडल बनें। साथ ही सीमांत गांवों में उपलब्ध संसाधनों और कमी (गैप) का वैज्ञानिक अध्ययन कर उसी अनुरूप योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन किया जाए।
वार्षिक कार्ययोजना 2025-26: प्रगति तेज़ करने के निर्देश
बैठक में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि योजनाओं का प्रभाव दिख रहा है, किंतु और बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
MPRY के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 12 जनपदों में 90 योजनाएं प्रस्तावित हैं।
MBADP के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 5 सीमांत जनपदों के चिन्हित विकासखंडों में 155 योजनाएं प्रस्तावित हैं।
मुख्य सचिव ने दोनों योजनाओं की प्रगति में तेज़ी लाने के निर्देश दिए।
संदर्भित है कि MPRY उत्तराखंड के 50% तक पलायन-प्रभावित 474 गांवों में आवासीय परिवारों, बेरोजगार युवाओं एवं रिवर्स माइग्रेंट्स को स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु संचालित है। MBADP के माध्यम से पांच सीमांत जनपदों के सीमांत विकासखंडों में सतत आजीविका व स्वरोजगार के संसाधन उपलब्ध कराकर पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Reported By: Praveen Bhardwaj













Discussion about this post