देहरादून के कुआंवाला स्थित शिक्षाविद ललित जोशी के निवास पर आयोजित होली मिलन समारोह सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बन गया। गढ़वाली और कुमाऊँनी परंपराओं के संगम में सजी इस संध्या में बैठकी होली की शास्त्रीय स्वर लहरियों और खड़ी होली की सामुदायिक ऊर्जा ने फागुन के रंगों को और गहरा कर दिया।
कार्यक्रम में गीता पुष्कर धामी ने सहभागिता करते हुए कहा कि बैठकी और खड़ी होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक एकता का प्रतीक हैं। महिलाओं ने शास्त्रीय रागों पर आधारित बैठकी होली प्रस्तुत की, वहीं पुरुषों ने ढोलक और हुड़के की थाप पर खड़ी होली से समां बांध दिया। झोड़ा-चांचरी और न्योली जैसी लोक विधाओं ने हिमालयी लोक आत्मा को सजीव कर दिया।
उप्रेती सिस्टर्स, लोकगायक बीरू जोशी, मनोज सामंत, गणेश कांडपाल और मनमोहन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को उल्लासमय बना दिया। पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों ने भी आयोजन की आत्मीयता को और बढ़ाया।
इस सांस्कृतिक आयोजन के सूत्रधार ललित जोशी ने अपने आवास को एक जीवंत मंच में बदलते हुए उत्तराखंड की समृद्ध होली परंपराओं को सहेजने और व्यापक पहचान दिलाने का सार्थक प्रयास किया। यह होली मिलन केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक स्मृतियों का भावपूर्ण आयोजन बनकर यादगार बन गया।
Reported By: Arun Sharma












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