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उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। राज्यभर के अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी “राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा” के बैनर तले कमिश्नरी के घेराव के लिए जुटे। हालांकि सार्वजनिक अवकाश के चलते कमिश्नरी में कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे प्रदर्शन प्रतीकात्मक रूप में ही सीमित रह गया।
मोर्चा के प्रदेश सह-संयोजक जसपाल गुंसाई ने बताया कि 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी GPF आधारित पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी गई थी। पुरानी व्यवस्था में कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन, महंगाई भत्ता (DA) और सामाजिक सुरक्षा मिलती थी। साथ ही GPF में जमा राशि पर ब्याज और जरूरत पड़ने पर निकासी की सुविधा भी उपलब्ध थी।
इसके विपरीत, नई पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है। उनका कहना है कि NPS के तहत पेंशन शेयर बाजार आधारित निवेश पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य असुरक्षित हो गया है। कर्मचारियों का दावा है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें बहुत कम—करीब 500 से 1000 रुपये प्रतिमाह—पेंशन मिल रही है, जो जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है।
मोर्चा के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोहित जोशी और आईटी सेल प्रभारी अवध्येश सेमवाल ने बताया कि संगठन केवल अपने अधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहा है। उन्होंने वृक्षारोपण, हरेला पर्व पर पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और कोविड-19 के दौरान जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों का उल्लेख किया।
संगठन के अनुसार, उत्तराखंड में करीब एक लाख कर्मचारी नई पेंशन योजना (NPS/UPS) से प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान पुरानी पेंशन बहाली का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मोर्चा ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द पुरानी GPF पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है। कर्मचारियों का मानना है कि यह फैसला न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
Reported By: Arun Sharma











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