पहाड़ी क्षेत्रों में इस वर्ष बरसात और बर्फबारी न होने से सूखी ठंड का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इसे लेकर विशेषज्ञ भी चिंता जता रहे हैं। सरोवर नगरी नैनीताल में पिछले चार माह से बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण चारों ओर सूखे हालात बने हुए हैं। इसका सीधा असर नैनीताल झील के जलस्तर पर भी पड़ा है।
आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी 2025 तक झील का जलस्तर 84 फीट 3 इंच था, जबकि 15 जनवरी 2026 को यह घटकर 83 फीट 7.5 इंच रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7.5 इंच कम है। हालांकि वर्ष 2025 में कुल वर्षा 2344 मिमी दर्ज की गई, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 211 मिमी अधिक रही, लेकिन हालिया महीनों में बारिश न होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बारिश और बर्फबारी की कमी का असर प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी देखने को मिल रहा है। सूखी ठंड के कारण अस्थमा के मरीजों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं।
वनस्पति विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी ने कहा कि बरसात, बर्फबारी और नमी की कमी से पर्यावरण पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। सूखी ठंड के कारण कोहरे का असर अब मैदानों के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों में भी बढ़ने लगा है।
वहीं बीड़ी पांडेय अस्पताल के चिकित्सकों ने लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने, बीमार होने पर समय पर दवा लेने और अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से पंप उपयोग करने की सलाह दी है। चिकित्सकों का कहना है कि सुबह और शाम की ठंड से बचने के लिए लोग दिन के समय टहलने को प्राथमिकता दें, ताकि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव से बचा जा सके।
अभिषेक गुप्ता, चिकित्सक
ललित मोहन कश्यप, सहायक अभियंता सिचाई विभाग
ललित तिवारी, प्रोफेसर वनस्पति विभाग
Reported By: Rajesh Kumar












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