अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मित्रता को मानवता, करुणा और वैश्विक शांति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मित्रता केवल एक भावनात्मक संबंध नहीं, बल्कि यह संस्कृतियों, देशों और दिलों को जोड़ने वाला पवित्र सेतु है।
स्वामी जी ने मित्रता को आत्मीयता, विश्वास और सहयोग का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह वह रिश्ता है जो बिना स्वार्थ के जीवन की हर परिस्थिति में साथ निभाता है। उन्होंने श्रीराम-सुग्रीव, श्रीकृष्ण-सुदामा और अर्जुन-श्रीकृष्ण जैसे पवित्र मित्रता संबंधों का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारी सनातन संस्कृति में मित्रता को दिव्यता और धर्म का स्वरूप माना गया है।
उन्होंने इस दिन को सच्चे मित्रों का आभार व्यक्त करने और संवाद, साझेदारी व सहानुभूति के माध्यम से समाज में समरसता बढ़ाने का अवसर बताया। साथ ही, जाति, भाषा, लिंग और क्षेत्रीय मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और सम्मानपूर्ण वातावरण बनाने की अपील की।
स्वामी जी ने कहा कि आज के युग में जब दुनिया विभिन्न मतभेदों से जूझ रही है, तब फ्रेंडशिप डे का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम केवल एक-दूसरे के ही नहीं, बल्कि प्रकृति, जल, वायु और सम्पूर्ण सृष्टि के भी सच्चे मित्र बनें।
उन्होंने मित्रता को वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के विस्तार के रूप में प्रस्तुत करते हुए आह्वान किया कि सभी मिलकर इस दिन को सच्चे अर्थों में मनाएं – संवाद बनाए रखें, पौधारोपण करें, जल स्रोतों की रक्षा करें और जैवविविधता का सम्मान करें। यही सच्ची मित्रता और सच्ची मानवता की पहचान है।
Reported By: Arun Sharma












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