उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (रीप) के अंतर्गत रूरल एंटरप्राइज एक्सीलरेशन प्रोजेक्ट ‘ग्रामोत्थान’ द्वारा 9 और 10 फरवरी को देहरादून के एक निजी होटल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय मल्टी-स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (एमएसपी) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए विशेष एवं पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) समूहों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय आयोजन ग्रामीण उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने, सामुदायिक उद्यमों को बाजार में पहचान दिलाने और सार्वजनिक-निजी-सामुदायिक साझेदारी को दीर्घकालिक रूप से बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ के माध्यम से महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ अभियान अपने लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में लगभग 30 निजी क्षेत्र की कंपनियों और उद्यमियों ने भाग लिया। इस दौरान परियोजना, जिला और सीएलएफ स्तर पर निजी भागीदारों के साथ 60 से अधिक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए गए। प्रदर्शनी में मंडुआ, झंगोरा जैसे मिलेट, काला सोयाबीन, तूर दाल, जीआई टैग उत्पाद बेडू (जैम एवं चटनी), मुंसियारी राजमा, ऐपन कला उत्पाद, हिमालयी घी, दून बासमती चावल, स्क्वैश, जैम, स्थानीय अचार तथा ऊनी और हैंडलूम उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
परियोजना निदेशक झरना कमठान ने बताया कि ‘ग्रामोत्थान’ उत्तराखंड सरकार के सहयोग से संचालित सहायतित परियोजना है, जो ग्रामीण उद्यमों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर केंद्रित है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 6000 से अधिक व्यक्तिगत उद्यम और 500 से अधिक सामुदायिक आधारित संगठन स्तर के उद्यम स्थापित किए जा चुके हैं। यह परियोजना प्रदेश के 5.6 लाख परिवारों और 60 हजार स्वयं सहायता समूहों तक पहुंच बना चुकी है।
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post