हरिद्वार/देहरादून: धर्मनगरी हरिद्वार के गंगा घाटों पर गंगा सभा द्वारा लगाए गए “गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित” वाले पोस्टरों ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। जहां विपक्ष इसे संविधान के खिलाफ बता रहा है, वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने धार्मिक पवित्रता का हवाला देते हुए इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
“पवित्रता का अपना महत्व” – महेन्द्र भट्ट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने पोस्टरों का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ विशेष धार्मिक स्थलों की अपनी मर्यादा और पवित्रता होती है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा:
जिस प्रकार हिंदू मक्का-मदीना नहीं जाते, उसी प्रकार अन्य धर्म के लोगों का गंगा स्नान के लिए आना सामान्य बात नहीं है।
उन्होंने विश्वास जताया कि कोई अन्य धर्म का व्यक्ति केवल स्नान के उद्देश्य से गंगाजल का उपयोग शायद ही करेगा।
‘सनातन’ में आने वालों का स्वागत
महेन्द्र भट्ट ने इस विवाद के बीच एक बड़ा बयान देते हुए कहा, “यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गंगा स्नान कर, पवित्र होकर सनातन धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए।” उनके इस बयान ने अब नई चर्चा छेड़ दी है।
विपक्ष का पलटवार: “देश सबका है”
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इन पोस्टरों की कड़ी निंदा की है। विपक्ष का कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी व्यक्ति के प्रवेश को धर्म के आधार पर रोकना गलत है। विपक्ष ने इसे समाज को बांटने वाली राजनीति करार दिया है।
गंगा सभा का पक्ष
गंगा सभा का मानना है कि घाटों की मर्यादा और सनातन परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। कुंभ और अन्य स्नान पर्वों के दौरान सुरक्षा और धार्मिक शुचिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसी मांगें उठती रही हैं।
फिलहाल, हरिद्वार के घाटों पर लगे ये पोस्टर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का बयान सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
Reported By: Rajesh Kumar













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