पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रावत ने कहा कि यह मामला वर्ष 2016 से जुड़ा हुआ है और उस समय भी चंदन जीना के आवास पर कार्रवाई हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान परिवार से जुड़े दस्तावेजों के साथ आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय जानकारियां भी मांगी गई थीं।
पुराने मामले में अब आगे बढ़ रही कार्रवाई
हरीश रावत के अनुसार, करीब एक दशक पुराने इस प्रकरण में अब लंबे समय बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार के लोगों से भी इस मामले में जानकारी ली जा रही है। रावत ने दावा किया कि उन्हें करीब 36 घंटे पहले ही कार्रवाई की जानकारी मिल गई थी और बाद में उन्होंने संबंधित व्यक्ति को ईडी कार्यालय में प्रवेश करते हुए देखा।
गौरतलब है कि ईडी ने सितंबर 2026 में चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी।
ईडी ने अपनी कार्रवाई के दौरान जीना के आवास से नकदी, सोने के सामान और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में मौजूद 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए जाने की भी बात कही थी।
हरीश रावत ने कार्रवाई के समय पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने मामले से जुड़ी कार्रवाई को इतने लंबे समय बाद आगे बढ़ाए जाने को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी की ओर से मामले में सामने आए वित्तीय लेनदेन तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
हरीश रावत के बयान ने चंदन जीना से जुड़े ईडी प्रकरण को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
Crime patrol












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