
नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से लागू किए गए समान नागरिक संहिता 2025 की सांविधानिकता सहित इस कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेन्दर एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। यूसीसी को चुनौती देने वाली लगभग आधा दर्जन से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई हैं। इनमें भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधान को जबकि मुस्लिम, पारसी आदि के वैवाहिक पद्धति की यूसीसी में अनदेखी किए जाने सहित अन्य प्रावधानों को चुनौती दी गई है। देहरादून के एलमसुद्दीन सिद्दीकी ने अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की अनदेखी करने की बात कही है।
नेगी ने याचिका में कहा है कि सामान्य शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की 18 वर्ष होनी आवश्यक है जबकि लिव इन रिलेशनशिप में दोनों की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे में उनके बच्चे वैध माने जाएंगे या नहीं। अगर कोई व्यक्ति अपनी लिव इन रिलेशनशिप से छुटकारा पाना चाहता है तो वह एक साधारण प्रार्थनापत्र रजिस्ट्रार को देकर 15 दिन के भीतर अपने पार्टनर को छोड़ सकता है जबकि साधारण विवाह में तलाक लेने के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। दशकों के बाद तलाक होता है, वह भी पूरा भरण-पोषण देकर।
Reported By: Arun Sharma













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