रामनगर के जस्सागांजा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी डंपरों की आवाजाही और जर्जर सड़कों से ग्रामीणों व स्कूली बच्चों को हो रही परेशानी के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि तीन साल पहले आरटीओ की ओर से दिए गए सुझावों पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने दो सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है।
रामनगर निवासी राजेंद्र सिंह और अन्य की ओर से वर्ष 2023 में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि रामनगर के जस्सागांजा समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों और स्कूलों तक आने-जाने वाली सड़कों पर भारी-भरकम डंपरों की लगातार आवाजाही से लोगों की सुरक्षा खतरे में है। इन मार्गों पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। याचिका में एक छात्रा की मौत समेत कई दुर्घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित क्षेत्र का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद हल्द्वानी के आरटीओ की ओर से कोर्ट को रिपोर्ट दी गई थी, जिसमें वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और सुरक्षा के जरूरी उपाय किए जाने का सुझाव दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आरटीओ की रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के बावजूद करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। खनन वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी तैयार नहीं किया गया है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कें भी जर्जर हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट रूप से जानकारी मांगी है कि आरटीओ के सुझावों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वर्तमान में कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं। अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अपना जवाब कोर्ट के समक्ष पेश करना होगा।
दुष्यंत मैनाली, अधिवक्ता हाईकोर्ट
Reported By: Praveen Bhardwaj












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