परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 दिव्यता के साथ संपन्न हो गया। इस महोत्सव में दुनिया भर से आए योग साधकों, संतों, राजनयिकों और आध्यात्मिक गुरुओं ने एक मंच पर एकत्र होकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश दिया।
महोत्सव के दौरान योग, ध्यान, प्राणायाम और आध्यात्मिक साधनाओं के माध्यम से मानवता को जोड़ने का प्रयास किया गया। Chidanand Saraswati ने कहा कि योग आज के तनावपूर्ण समय में शांति और संतुलन का सेतु बनकर उभरा है, जो मनुष्य को स्वयं, प्रकृति और परमात्मा से जोड़ता है।
इस आयोजन में लगभग 80 देशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे यह महोत्सव वैश्विक एकता और भारतीय सनातन संस्कृति का प्रतीक बन गया। समापन के अवसर पर साधक भावुक होकर माँ गंगा के तट से विदा हुए और अपने साथ योग, शांति और प्रेम का संदेश लेकर लौटे।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 80 देशों का सहभाग – अफगानिस्तान, अंगोला, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, भूटान, ब्राजील, बुल्गारिया, बुर्किना फासो, कंबोडिया, कनाडा, चाड, चिली, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, क्यूबा, डेनमार्क, इक्वाडोर, मिस्र, फिजी, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, घाना, गुयाना, गिनी-बिसाऊ, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जापान, कजाख़स्तान, कोरिया, किर्गिस्तान, लाओस, मलेशिया, मलावी, मालदीव, मॉरीशस, मेक्सिको, मोल्दोवा, मंगोलिया, मोरक्को, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, न्यूजीलैंड, नाइजर, नाइजीरिया, नॉर्वे, ओमान, पेरू, पुर्तगाल, रोमानिया, रूस, सर्बिया, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, श्रीलंका, सूरीनाम, स्विट्जरलैंड, सीरिया, ताइवान, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, जाम्बिया और जिम्बाब्वे।
परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आयोजित प्रमुख योग की विधायें-लीला योग, हठ योग, हठ विन्यास योग, विन्यास योग, पावर योग, अष्टांग योग, अयंगर योग, कलारी फ्लो योग, प्राण मंडल विन्यास, सूर्य नमस्कार साधना, सूर्य आराधना, प्राणायाम, प्राणायाम अभ्यास, श्वास विज्ञान, नाड़ी योग, कुंडलिनी ऊर्जा सक्रियण, ध्यान, विशोक ध्यान, कुंडलिनी ध्यान, राज योग ध्यान, हिमालयन मेडिटेशन, मंत्र ध्यान, आध्यात्मिक योग साधनाएँ, कर्म योग, भक्ति योग, कुंडलिनी योग, क्रिया योग, मुद्रा साधना, ध्वनि एवं नाद योग, नाद योग, साउंड हीलिंग, गोंग बाथ, कीर्तन, मंत्र जप, आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य, आयुर्वेदिक जीवनशैली, मार्म चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल डिटॉक्स, मस्तिष्क संतुलन, विशेष योग अभ्यास, योग निद्रा, यिन योग, रिस्टोरेटिव योग, चक्र संतुलन योग, पंचकोश साधना आदि अनेक विधाओं का अभ्यास कराया जा रहा है।
Reported By: Arun Sharma












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