उत्तराखंड कैबिनेट ने राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ता और पर्यवेक्षकों को एक बार आपसी सहमति के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
कैबिनेट ने राज्य में लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्ति की नई प्रक्रिया को मंजूरी दी है। इससे भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय कम होगा, मुकदमेबाजी घटेगी और जनहित परियोजनाओं की लागत कम होगी।
उधम सिंह नगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित करने के लिए सिडकुल को हस्तांतरित किए जाने से जुड़े शासनादेश में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है, जिससे समान प्रयोजन हेतु उप-पट्टा देने का रास्ता साफ हुआ है।
जनजाति कल्याण विभाग के ढांचे को मजबूत करते हुए देहरादून, चमोली, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित करने और सेवा नियमावली में संशोधन को स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने गैर-कृषि उपयोग के लिए भू-जल दोहन पर जल मूल्य/प्रभार की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक और जल संसाधनों का संरक्षण है।
उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय” की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए रक्षा मंत्रालय को लीज पर हस्तांतरित करने पर भी कैबिनेट ने सहमति दी है।
इसके साथ ही राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” को मंजूरी दी गई है, जिससे हरित ऊर्जा, रोजगार और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिलेगी।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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