पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत में ऊर्जा आपूर्ति पर शुरुआती दबाव महसूस हो रहा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख मार्गों पर व्यवधान ने कच्चे तेल, गैस और उर्वरक आयात को प्रभावित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि स्थिति चिंताजनक है, लेकिन भारत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
देशभर में एलएनजी, सीएनजी और एलपीजी की आपूर्ति में कुछ बाधाएं आई हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र को कोयले की ओर रुख करना पड़ा है। भारत की कोयला मांग सालाना 1.25 बिलियन टन से अधिक हो चुकी है और इसके दामों में भी तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोयला भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बना हुआ है, और मौजूदा स्टॉक 18–20 दिनों तक की खपत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।
कुल मिलाकर, ऊर्जा संकट अभी नियंत्रित है, लेकिन वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितताओं ने घरेलू ऊर्जा बाजार को सतर्क कर दिया है।
Reported By: Arun Sharma














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