दिल्ली में नमामि गंगे और विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “जल प्रहरी 2025” का छठा संस्करण एक भव्य और प्रेरक जल-जागरण अभियान के रूप में शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष और विख्यात आध्यात्मिक संत स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य व मार्गदर्शन में हुआ। समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, विभिन्न मंत्रियों व सांसदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र को “सुजलम–सुफलम, हरित–पवित्र” बनाने की दिशा में एक शक्तिशाली राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि जल केवल तत्व नहीं, जीवन का प्रथम मंत्र और धरती का प्राण है। उन्होंने चेताया कि जल संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। स्वामी जी ने बच्चों के भविष्य और जल संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया तथा हर नागरिक से “जल प्रहरी” बनने का आह्वान किया।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल ने जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अटल भू-जल योजना और अन्य पहलों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार जल प्रबंधन और स्वच्छ जल उपलब्धता पर सर्वोच्च प्राथमिकता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर पानी पहुंचाने और भूजल स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के अवसर पर पर्वतीय पारिस्थितिकी की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्वत केवल भू-आकृति नहीं, बल्कि जल, जंगल और जैव-विविधता के मुख्य स्तंभ हैं। हिमालय और अन्य पर्वतों का संरक्षण सीधे मानव अस्तित्व से जुड़ा है, इसलिए इको-फ्रेंडली विकास मॉडल अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी मंत्रियों और सांसदों ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय धर्म बताते हुए अपने विचार रखे। नमामि गंगे, दिल्ली मेट्रो, इंडियन ऑयल, एफएच एंड आरए, जल जीवन मिशन, अमर उजाला और अन्य अनेक संस्थानों के सहयोग से आयोजित जल प्रहरी 2025 जल संरक्षण और पर्यावरण जागरण के लिए एक दिव्य और प्रेरक पहल सिद्ध हुआ।
Reported By: Arun Sharma












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