गीता-जयंती और मोक्षदा एकादशी के पावन दिन, दोपहर 1 बजे परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परम आदरणीय महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए। वे लंबे समय से वृद्धावस्थाजनित व्याधियों से पीड़ित थे और विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत थे। विगत 15 अक्टूबर को परमार्थ परिवार ने उनका 90वां जन्मोत्सव मनाया था।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि स्वामी असंगानन्द जी ने मात्र नौ वर्ष की आयु में अपने जीवन को गुरु चरणों में समर्पित कर दिया था। शाहजहांपुर में अध्ययन के बाद वे परमार्थ निकेतन पहुंचे, जहाँ उन्होंने अध्यापन, साधना और सेवा के माध्यम से अनगिनत श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। उनका सरल, सहज और अपनत्व से भरा व्यक्तित्व सभी के हृदयों में अमिट रहेगा।
दैवी सम्पद मंडल के माध्यम से धर्मरक्षा, ज्ञान-प्रसार और सामाजिक सहयोग के उनके कार्य प्रेरणा-स्तम्भ हैं। परमार्थ निकेतन में उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। उनका पार्थिव शरीर 2 दिसम्बर 2025 को दोपहर 1 बजे तक आश्रम में दर्शनार्थ रखा जाएगा, ताकि सभी श्रद्धालु अंतिम दर्शन कर सकें।
पूरे परमार्थ निकेतन परिवार ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संकल्प लिया कि उनके आदर्शों और शिक्षाओं के प्रकाशपथ पर आगे बढ़ते रहेंगे।
Reported By: Arun Sharma












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