AIIMS Rishikesh के सोशल आउटरीच सेल द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण में युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि युवाओं का स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक, वित्तीय और डिजिटल पहलुओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
सर्वे के अनुसार, जहां करीब आधे युवा नियमित व्यायाम करते हैं और दो-तिहाई पर्याप्त नींद लेते हैं, वहीं मानसिक दबाव एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है। लगभग 23% युवाओं ने चिंता और घबराहट की समस्या बताई, जबकि 31.8% ने आत्म-क्षति से जुड़े विचार साझा किए।
सामाजिक और वित्तीय स्तर पर भी चुनौतियां सामने आईं—करीब आधे युवाओं को लगता है कि उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जाता, और बड़ी संख्या में युवा आर्थिक तनाव से प्रभावित हैं। डिजिटल उपयोग भी चिंता का विषय है, जहां लगभग 29% युवा रोजाना 4 घंटे से अधिक स्क्रीन पर बिताते हैं।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. संतोष कुमार के अनुसार, युवाओं की समस्याओं को अलग-अलग नहीं बल्कि समग्र दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है।
इसी दिशा में 25 मार्च 2026 को ऋषिकेश में “नेशनल यूथ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और युवाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा होगी। यह पहल युवाओं के समग्र विकास और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
Reported By: Arun Sharma












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