उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सोशल मीडिया से जुड़ा विवाद सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी एक AI आधारित वीडियो को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए बैकग्राउंड में “मजार शरणम गच्छामि” और “मस्जिद शरणम गच्छामि” जैसे ऑडियो सुनाई दे रहे हैं। भाजपा इसे कांग्रेस की कथित तुष्टिकरण राजनीति का प्रतीक बता रही है, जबकि कांग्रेस ने इसे समाज को बांटने की साजिश करार दिया है।
भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से यह वीडियो साझा किया है। पार्टी का दावा है कि इसके माध्यम से कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति को जनता के सामने उजागर किया गया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मुस्लिम यूनिवर्सिटी, नमाज़ की छुट्टी जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया गया, जिससे सनातन संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास हुआ। भाजपा का यह भी कहना है कि मौजूदा सरकार द्वारा सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से कांग्रेस असहज है।
कमलेश रमन, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
वहीं इस AI वीडियो पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के वीडियो देश की सामाजिक एकता और सद्भावना को तोड़ने का प्रयास हैं। हरीश रावत ने दावा किया कि वे उन पहले लोगों में शामिल रहे हैं जिन्होंने बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण के नाम पर विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह समाज को बांटने के लिए नए-नए संगठन और मोर्चे खड़े कर रही है। उनका कहना है कि भाजपा का चुनावी एजेंडा हिंदू-मुस्लिम राजनीति तक सीमित है, ताकि बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, महिलाओं पर अत्याचार, कुपोषण और पलायन जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
Reported By: Arun Sharma












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