उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र का शुभारंभ भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के ऐतिहासिक संबोधन से हुआ। यह अवसर उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में दूसरा मौका है जब किसी राष्ट्रपति ने सदन को संबोधित किया।
महामहिम के आगमन पर राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह (से.नि.), विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर ‘रम्माण मेला’ की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने कहा कि रजत जयंती वर्ष में राष्ट्रपति का उपस्थित होना देवभूमि के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने राज्य गठन में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका का स्मरण करते हुए बताया कि विधानसभा ने अब तक 500 से अधिक विधेयक पारित किए हैं और National e-Vidhan Application (NeVA) के माध्यम से पेपरलेस विधानसभा की दिशा में कदम बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सत्र राज्य की विकास यात्रा और अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने का अवसर है। राज्यपाल ने इसे ‘दिशा–निर्धारण सत्र’ बताते हुए कहा कि उत्तराखंड ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में उत्तराखंड को शौर्य, अध्यात्म और परंपराओं की भूमि बताया तथा समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का परम कर्तव्य पारदर्शी सुशासन देना है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए नए विचार और दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
Reported By: Arun Sharma












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