दून बुक फेस्टिवल विविध और रोचक आयोजनों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। दिनभर चले कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे परिसर में रचनात्मकता और ऊर्जा का माहौल बना रहा।
बाल मंडप में आयोजित गतिविधियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। चिल्ड्रन कॉर्नर के छठे दिन लगभग 800 छात्रों ने भाग लिया। यहाँ “ऐपन आर्ट कॉर्नर” में बच्चों ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला ऐपन को समझा और उसे अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत किया। स्टोरीटेलर राजेश पांडेय ने “Travelling Tree” और “A Tiny Sapling” जैसी कहानियों के जरिए बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के महत्व से परिचित कराया। इसके बाद डॉ. संगीता अंगोम के पिक्शनरी गेम सत्र में बच्चों ने खेल-खेल में वन्यजीव और प्रकृति से जुड़ी जानकारी हासिल की। वहीं नेहा और आर्ची के ज़ाईन मेकिंग वर्कशॉप में बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को रचनात्मक रूप दिया।
साहित्यिक सत्रों में भी दर्शकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। चंद्रचूर घोष और अनुज धर ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने नए अभिलेखीय स्रोतों और शोध के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम की जटिलताओं पर प्रकाश डाला। इस सत्र ने श्रोताओं को इतिहास को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित किया।
लेखक, इतिहासकार और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजीव चोपड़ा ने साहित्य के माध्यम से भारत के इतिहास को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल के साथ संवाद में उन्होंने साहित्य के महत्व और इतिहास को समझने में उसकी भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन उत्तराखंड की लोक गायिका प्रियंका मेहर की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को लोक संगीत की मधुर धुनों से मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजकों ने बताया कि अगले दिन भी बाल मंडप और साहित्यिक सत्रों में कई रोचक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्टोरीटेलिंग, वर्कशॉप और विशेष संवाद सत्र शामिल होंगे। दून बुक फेस्टिवल का यह संस्करण ज्ञान, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक यादगार अनुभव साबित हुआ।
Reported By: Arun sharma












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