रुद्रप्रयाग। जनपद में आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय क्षमता को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को मदमहेश्वर, कुंड, छेनागाड़, केदारनाथ पैदल मार्ग और नरकोटा में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान अगस्त्यमुनि खेल मैदान को स्ट्रेचिंग एरिया के रूप में चिन्हित कर राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन किया गया।
मॉक ड्रिल के तहत विभिन्न आपदा परिदृश्यों का सजीव अभ्यास किया गया। मदमहेश्वर क्षेत्र में भारी बारिश के बाद फ्लैश फ्लड और ट्रेक मार्ग पर पुल बह जाने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें 300 से 500 ट्रेकर्स, तीर्थयात्री और स्थानीय लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। राहत दलों ने खराब मौसम और भूस्खलन के बीच सुरक्षित निकासी का अभ्यास किया।
कुंड क्षेत्र में मंदाकिनी और मध्यमहेश्वर गंगा के जलस्तर में वृद्धि तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर भारी भूस्खलन की स्थिति का अभ्यास किया गया। इस दौरान 5,000 से 7,000 तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के फंसने की कल्पित स्थिति में यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने की तैयारियों का परीक्षण किया गया।
छेनागाड़ क्षेत्र में बादल फटने की काल्पनिक घटना के तहत अचानक आई बाढ़ और मलबा प्रवाह का अभ्यास किया गया। इसमें आवासीय भवनों, गौशालाओं और कृषि भूमि को नुकसान तथा लोगों के लापता और घायल होने की स्थिति में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान चलाया।
वहीं केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगल चट्टी, भीमबली और लिनचोली के बीच भूस्खलन एवं रॉक फॉल की स्थिति बनाई गई। इस दौरान 3,000 से 5,000 तीर्थयात्रियों के फंसने का परिदृश्य तैयार कर राहत दलों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और संचार व्यवस्था बनाए रखने का अभ्यास किया।
नरकोटा क्षेत्र में सड़क कटाव और रॉक फॉल से राजमार्ग क्षतिग्रस्त होने तथा वाहनों के फंसने की काल्पनिक स्थिति में लगभग 3,000 से 4,000 यात्रियों के प्रभावित होने का परिदृश्य तैयार किया गया। पुलिस, यातायात पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से वैकल्पिक होल्डिंग एरिया बनाकर यातायात एवं राहत प्रबंधन का अभ्यास किया।
पूरे अभ्यास के दौरान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, प्रभावी समन्वय और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाना था।
मॉक ड्रिल के समापन पर जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सभी विभागों और एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर सभी टीमों ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और संसाधनों का प्रभावी उपयोग ही जनहानि को कम करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नियमित अभ्यास भविष्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सक्षम एवं प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा रुद्रप्रयाग
Reported By: Arun sharma












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