विश्व चिल्ड्रन दिवस के अवसर पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने संपूर्ण मानवता और विशेष रूप से बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिन आत्मचिंतन और भविष्य निर्माण का है। उन्होंने कहा कि बच्चे केवल परिवार की खुशियाँ ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की दिशा और विश्व का भविष्य हैं। उनकी मासूम मुस्कान, जिज्ञासा और सरलता में दिव्यता छिपी है।
स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बचपन को सदैव पवित्र और सृजनात्मक ऊर्जा से भरपूर माना गया है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों को सुविधाओं से अधिक संस्कार दें, क्योंकि चरित्र निर्माण केवल संस्कारों से ही संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानन्द के उदाहरण देते हुए कहा कि महान व्यक्तित्व घर के संस्कारों से ही निर्मित होते हैं।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्य, करुणा, जिम्मेदारी और आत्मानुशासन की भी आवश्यकता है। यदि तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का समन्वय किया जाए, तो बच्चे संवेदनशील और चरित्रवान नागरिक बनकर देश का भविष्य उज्ज्वल करेंगे।
स्वामी जी ने कहा कि बच्चों का बचपन भय और चिंता से मुक्त होना चाहिए। उन्हें ऐसा वातावरण मिले जहाँ वे खुलकर सपने देख सकें और विकसित हो सकें। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और संस्कार हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में स्वामी जी ने सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे आनंद, ऊर्जा और सफलता से परिपूर्ण जीवन जियें और मानवता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ।
Reported By: Arun Sharma












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