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परमार्थ निकेतन में ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भारतीय सेना के साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की राष्ट्रीय चेतना, आत्मसम्मान और आतंकवाद के खिलाफ अडिग संकल्प का प्रतीक है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि एक वर्ष पूर्व पहलगाम में हुआ आतंकी हमला केवल निर्दोष लोगों पर नहीं, बल्कि भारत की शांति, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता पर हमला था। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने भारत की सहनशीलता को कमजोरी समझने की भूल की, लेकिन भारतीय सेना ने अपने साहस और रणनीतिक क्षमता से स्पष्ट कर दिया कि नया भारत आतंक और अन्याय का निर्णायक जवाब देना जानता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय संकल्प की अभिव्यक्ति था। इस अभियान ने साबित किया कि भारत अपनी संप्रभुता, सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है।
स्वामी जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से शौर्य और राष्ट्रभक्ति का स्वर्णिम इतिहास रचा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के विश्वास, सम्मान और भविष्य की भी रक्षा करती है। जवान कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रसेवा में समर्पित रहते हैं और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि “सिंदूर” भारतीय संस्कृति में शक्ति, सम्मान और समर्पण का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव को कोई भी शक्ति समाप्त नहीं कर सकती।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सेवा की भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि आतंकवाद मानवता और शांति के खिलाफ युद्ध है, इसलिए विश्व समुदाय को इसके विरुद्ध एकजुट होकर कठोर कदम उठाने होंगे।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने भारत माता के वीर सपूतों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र सदैव उनके बलिदान और समर्पण का ऋणी रहेगा।
Reported By: Arun Sharma












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