
भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) काशीपुर में आयोजित दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का बुधवार को समापन हो गया। 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य संस्थान में पठन-पाठन, निरंतर सीखने (सतत अधिगम) और बौद्धिक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना था।
15 हजार से अधिक पुस्तकों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में देश-विदेश के 20 से अधिक प्रमुख प्रकाशकों और वितरकों ने हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 15,000 पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। इनमें पिछले दो वर्षों में प्रकाशित नई पुस्तकें भी शामिल रहीं। प्रदर्शनी में प्रबंधन, मानविकी, मनोविज्ञान, हिंदी व अंग्रेजी साहित्य, महापुरुषों की जीवनियों तथा उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत से जुड़ी पुस्तकों का समृद्ध संग्रह देखने को मिला।
प्रदर्शनी में वीवा बुक्स, नियोगी बुक्स, सेज पब्लिकेशन्स, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, राजकमल प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन, वाणी बुक्स, रूटलेज सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने भाग लिया।
डिजिटल दौर में मुद्रित पुस्तकों का महत्व
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में डिजिटल संसाधनों के साथ-साथ मुद्रित पुस्तकों के प्रति रुचि और गहन पठन (Deep Reading) की आदत को प्रोत्साहित करना है। गहन पठन से एकाग्रता, चिंतन क्षमता और बौद्धिक जिज्ञासा का विकास होता है, जो शोध एवं अध्ययन के लिए बेहद आवश्यक है।
“पुस्तकालय संस्थान का हृदय” — प्रो. नीरज द्विवेदी
आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रो. नीरज द्विवेदी ने प्रदर्शनी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का हृदय होता है और इसके संग्रह को समृद्ध बनाना संस्थान की प्रगति के लिए आवश्यक है। पठन से गहन चिंतन, जिज्ञासा और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति विकसित होती है।” उन्होंने संकाय सदस्यों और छात्रों को पुस्तकों का अवलोकन कर पुस्तकालय के लिए नई पुस्तकों की अनुशंसा करने के लिए भी प्रेरित किया।
इस आयोजन में संस्थान के संकाय सदस्य, शोधार्थी, कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यह प्रदर्शनी आईआईएम काशीपुर के पुस्तकालय को ज्ञान और शोध के समृद्ध केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों का एक प्रमुख हिस्सा है।
Reported BY: Arun Sharma













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