देहरादून: उत्तराखंड में वर्तमान में शीतकालीन चारधाम यात्रा उत्साह के साथ जारी है। जहाँ एक ओर श्रद्धालु भगवान के शीतकालीन प्रवास स्थलों पर दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार ने आगामी मुख्य चारधाम यात्रा के लिए अपनी कमर कस ली है। अप्रैल-मई में जब केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलेंगे, तो सरकार श्रद्धालुओं को बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि: सौरभ बहुगुणा
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा ने आगामी यात्रा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा न केवल उत्तराखंड की आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह दुनिया भर के तीर्थयात्रियों के लिए एक मुख्य केंद्र है।
मंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु:
वैश्विक स्तर की व्यवस्थाएं: दुनिया भर से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
पिछले अनुभवों से सीख: मंत्री ने याद दिलाया कि पिछले साल विपरीत भौगोलिक और मौसम की परिस्थितियों के बावजूद यात्रा सुचारू रही और रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
सुरक्षित यात्रा का आश्वासन: उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से चारधाम यात्रा पर आने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सुरक्षा और सुविधा के हर संभव प्रयास कर रही है।
प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई तैयारी
अप्रैल-मई में विधिवत यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने बुनियादी ढांचों, सड़कों के रखरखाव और पंजीकरण (Registration) प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने पर काम शुरू कर दिया है। शीतकालीन प्रवास स्थलों (जैसे उखीमठ, पांडुकेश्वर आदि) में वर्तमान में चल रही पूजाओं में भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
एक नज़र में आगामी चारधाम यात्रा:
प्रस्तावित शुरुआत: अप्रैल-मई 2026 (कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा जल्द)।
शीतकालीन केंद्र: वर्तमान में श्रद्धालु शीतकालीन प्रवास स्थलों पर कर रहे पूजा।
प्रमुख फोकस: सुरक्षित सड़क मार्ग, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुगम दर्शन।
Reported BY: Arun Sharma













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