उत्तरकाशी जिले के ज्ञानसू में बना 2 एमएलडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) नमामि गंगे परियोजना के उद्देश्य को पूर्णतः विफल कर रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार यह प्लांट व्यवहार में बेकार साबित हो रहा है, क्योंकि स्थानीय लोगों के अनुसार यहां सीवेज का किसी भी स्तर पर उपचार नहीं किया जा रहा। उत्तराखण्ड जल संस्थान द्वारा संचालित इस STP से बिना किसी प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक उपचार के कच्चा, दुर्गंधयुक्त सीवेज सीधे गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब पता चलता है कि प्लांट में न एलम डाला जा रहा है, न हाइपोक्लोराइट, और न ही किसी प्रकार की रासायनिक या जैविक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पानी का pH, BOD, COD जैसे मानकों की कोई जांच नहीं की जा रही, जिससे यह स्पष्ट है कि महंगे प्लांट का संचालन केवल दिखावे तक सीमित है—जबकि गंगा में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि मोटी पाइपलाइन से दिन-रात काले, झागयुक्त सीवेज का प्रवाह गंगा में देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह untreated सीवेज जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कोलीफॉर्म बैक्टीरिया के स्तर को बेहद खतरनाक बना सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें गंगा सफाई पर अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, तो उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सरकारी विभाग ही प्रदूषण का कारण क्यों बन रहा है? यह स्थिति नमामि गंगे परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। इसके बावजूद जल संस्थान के उत्तरकाशी अधिकारी ने इस मामले में किसी भी प्रतिक्रिया से इनकार कर दिया है।
Reported By: Gopal Nautiyal












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