कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही हरिद्वार में शिवभक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए हरिद्वार पहुंच रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से आए एक दंपति ने अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
मोदीनगर निवासी दिव्यांग श्रद्धालु सचिन को उनकी पत्नी आशा करीब 180 किलोमीटर तक अपने कंधों पर बैठाकर हरिद्वार लेकर पहुंचीं। हरकी पैड़ी से गंगाजल भरने के बाद दोनों ने कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। विशेष बात यह है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब आशा अपने पति की कांवड़ यात्रा का संकल्प पूरा करने के लिए यह कठिन सफर तय कर रही हैं।
इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए रास्ते में लोग रुककर दंपति का उत्साहवर्धन कर रहे हैं। श्रद्धालु उनके जज्बे को सलाम करते हुए यात्रा की सफलता और भगवान शिव से उनके सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब 12 वर्ष पहले रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण सचिन चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था कभी कम नहीं हुई। जब उन्होंने दोबारा कांवड़ यात्रा करने की इच्छा व्यक्त की, तो उनकी पत्नी आशा ने इसे अपना संकल्प बना लिया। पिछले वर्ष पहली बार उन्होंने अपने पति को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार की यात्रा पूरी कराई थी और इस वर्ष भी उसी संकल्प को दोहराया।
इस बार दंपति अपने दो बच्चों के साथ हरिद्वार पहुंचे। गंगाजल लेने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। आशा का कहना है कि पति का साथ निभाना ही उनका सबसे बड़ा धर्म है, जबकि सचिन अपनी पत्नी के त्याग, समर्पण और प्रेम को भगवान शिव का आशीर्वाद मानते हैं।
यह अनोखी कांवड़ यात्रा केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि जीवनसाथी के प्रति अटूट विश्वास, प्रेम, समर्पण और कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का साथ निभाने की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।
आशा, शिवभक्त
सचिन, शिवभक्त.
Reported By: Praveen Bhardwaj












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