विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस-2026 के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश में जनजागरूकता और सहभागिता गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई। मनोरोग विभाग, सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन नर्सिंग एजुकेशन एंड रिसर्च (सीएनईआर) और टेली-मानस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या की रोकथाम, मदद मांगने के व्यवहार को प्रोत्साहित करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2024-2026 के त्रिवर्षीय विषय ‘आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना’ (Changing the Narrative on Suicide) के तहत आयोजित किया गया। संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह और डीन एकेडमिक्स प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय के नेतृत्व में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम का संदेश दिया गया।
नुक्कड़ नाटक से दिया मदद मांगने का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत एम्स के ओपीडी क्षेत्र में नर्सिंग छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक से हुई। छात्रों ने शैक्षणिक दबाव, भावनात्मक तनाव और आत्महत्या के बढ़ते मामलों की रोकथाम में परिवार के सहयोग की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
नाटक के माध्यम से भावनात्मक तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, आत्महत्या के विचारों को लेकर चुप्पी तोड़ने और निराशा या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे लोगों को समय पर पेशेवर एवं सामाजिक सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही ऐसा माहौल बनाने पर जोर दिया गया, जहां लोग बिना डर और कलंक के अपनी परेशानियां साझा कर सकें।
‘वॉल ऑफ होप’ और स्टोन पेंटिंग ने दिया उम्मीद का संदेश
कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित ‘वॉल ऑफ होप’ गतिविधि में नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों ने सकारात्मक संदेशों, नारों और आशा की अभिव्यक्तियों के माध्यम से भाग लिया। इस पहल के जरिए छात्रों ने समर्थन, करुणा, लचीलापन और उम्मीद का सामूहिक संदेश दिया।
इसके अलावा स्टोन पेंटिंग गतिविधि में छात्रों और चिकित्सा बिरादरी के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने रंगों और रचनात्मक संदेशों के माध्यम से जीवन, आशा और आत्महत्या रोकथाम से जुड़े अपने विचार व्यक्त किए।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मनोरोग विभाग के प्रो. डॉ. अनिंद्य दास, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपिंदर देओल और उप नर्सिंग अधीक्षक अरुण रवि शामिल रहे।
छात्र-शिक्षक संवाद में खुलकर हुई चर्चा
जागरूकता अभियान के तहत ‘आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना’ विषय पर छात्र-शिक्षक संवाद का आयोजन भी किया गया। इसमें वरिष्ठ अकादमिक एवं प्रशासनिक सदस्यों और विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक और चुप्पी को तोड़ने, शुरुआती संकेतों की पहचान, सहानुभूतिपूर्ण संवाद और समय पर मदद लेने के तरीकों पर चर्चा की।
पैनल में डीन एकेडमिक्स प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, सीएनईआर की प्राचार्या प्रो. स्मृति अरोड़ा, चीफ प्रोवोस्ट एवं मनोरोग प्रोफेसर प्रो. रवि गुप्ता, एसोसिएट डीन-छात्र कल्याण डॉ. वंदना कुमार ढींगरा और मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल धीमान शामिल रहे।
विद्यार्थियों की ओर से एमबीबीएस छात्र दुष्यंत एवं चेतना, मनोरोग विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. आनंद सिंह, बीएससी नर्सिंग की छात्रा मुस्कान और एलाइड हेल्थ साइंसेज से एमपीएच की छात्रा डॉ. जेया वार्षिणी ने सक्रिय भागीदारी की। सत्र का संचालन टेली-मानस की सीनियर रेजिडेंट डॉ. दर्शना रामरखानी ने किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर समय रहते बातचीत और मदद मांगना महत्वपूर्ण है तथा सहानुभूति, सहयोग और खुला संवाद आत्महत्या रोकथाम की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Reported By: Arun Sharma











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