उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संस्थापक एवं संयोजक पीसी तिवारी ने धामी सरकार द्वारा यूआईआईडीबी के माध्यम से प्रदेश की करीब 7 हजार बीघा सरकारी भूमि को पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनियों को होटल, रिसोर्ट, स्कूल और वेलनेस सेंटर समेत अन्य परियोजनाओं के लिए दीर्घकालीन लीज पर देने की योजना का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने इसे निवेश के नाम पर उत्तराखंड की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े पूंजीगत हितों के हवाले करने की कोशिश करार दिया।
पीसी तिवारी ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नैनीसार की 353 नाली भूमि जिंदल समूह को दिए जाने के विरोध में ‘नैनीसार बचाओ, उत्तराखंड बचाओ’ आंदोलन खड़ा हुआ था, उसी तरह की नीति को अब कहीं बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि नैनीसार आंदोलन ने उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकार का मुद्दा व्यापक जनमुद्दा बनाया था।
90 साल की लीज पर उठाए सवाल
पार्टी ने कहा कि 90 वर्ष की लीज केवल मौजूदा सरकार का फैसला नहीं है, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के भूमि अधिकारों को प्रभावित करने वाला निर्णय है। सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन किसे, किन शर्तों और किस दर पर दी जा रही है।
पार्टी ने भूमि का पूरा विवरण, लीज की शर्तें, आवंटन प्रक्रिया और संभावित लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करने के साथ ही इस नीति पर खुली बहस कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों को मिले प्राथमिकता
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य रोजगार और स्थानीय विकास है तो सरकारी भूमि के उपयोग में स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों, महिला समूहों, सहकारी समितियों और स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पार्टी के अनुसार खाली और बंजर सरकारी भूमि का इस्तेमाल स्थानीय लोगों के आवास, कृषि, आजीविका और रोजगार के लिए किया जाना चाहिए। गांवों में सामुदायिक और सहकारी उद्यमों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
‘पहाड़ की जमीन पूंजीपतियों के मुनाफे का साधन नहीं’
पीसी तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन इसलिए नहीं हुआ था कि पहाड़ की जमीन कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों के मुनाफे का साधन बन जाए। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर हिमालय का विनाश और पर्यटन के नाम पर उत्तराखंड को बाहरी धनाढ्य वर्ग और वीआईपी के ऐशगाह में बदलने की नीति स्वीकार नहीं की जा सकती।
पार्टी ने अंकिता भंडारी जैसी त्रासदियों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को स्थानीय लोगों के अधिकार, रोजगार और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
जनआंदोलन की चेतावनी
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि नैनीसार, डानाकाना और फलसीमा समेत विभिन्न मामलों में पार्टी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की कथित लूट के खिलाफ संघर्ष करती रही है। अब इस मुद्दे को भी उत्तराखंड के अस्तित्व, भूमि अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़कर जनता के बीच ले जाया जाएगा।
पार्टी ने सरकार से 7 हजार बीघा सरकारी भूमि को निजी हाथों में लीज पर देने की योजना तत्काल निरस्त करने, यूआईआईडीबी के तहत प्रस्तावित सभी भूमि आवंटनों का विवरण सार्वजनिक करने, नीति पर खुली बहस कराने और सरकारी जमीन के उपयोग में स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता देने की मांग की।
पीसी तिवारी ने कहा, “उत्तराखंड की जमीन कोई सत्ता की जागीर नहीं है। नैनीसार के समय जनता ने जमीन की लूट का विरोध किया था और आज फिर हजारों बीघा जमीन का सवाल सामने है। इसे पूंजीपतियों के हवाले करने की हर कोशिश का जनता के साथ मिलकर पुरजोर विरोध किया जाएगा।”
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने प्रदेश की जनता, युवाओं, महिलाओं, किसानों और लोकतांत्रिक शक्तियों से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर जनआंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया।
Reported By: Arun Sharma












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