भारतीय परंपराओं में भाई-बहन के रिश्ते को बेहद पवित्र और भावनात्मक माना गया है। इस रिश्ते से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं आज भी धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं। ऐसी ही एक अनोखी कथा मृत्यु के देवता धर्मराज यमराज और उनकी बहन मां यमुना से जुड़ी है। इस भाई-बहन के रिश्ते की आस्था उत्तराखंड के विकासनगर स्थित डाकपत्थर में भी देखने को मिलती है, जहां यमुना नदी के किनारे यमराज का मंदिर स्थित है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां धर्मराज यमराज के साथ उनकी बहन मां यमुना और मनुष्य के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त की भी पूजा-अर्चना की जाती है। मृत्यु के देवता माने जाने वाले यमराज का नाम जहां आमतौर पर मन में भय का भाव पैदा करता है, वहीं इस मंदिर में उनकी पूजा श्रद्धा और आस्था के साथ की जाती है।
सूर्यदेव की संतान माने जाते हैं यमराज और यमुना
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यमराज और यमुना भाई-बहन हैं और दोनों को सूर्यदेव की संतान माना जाता है। यमराज मनुष्यों के कर्मों के आधार पर न्याय करने वाले देवता माने जाते हैं, जबकि यमुना स्वयं एक पवित्र नदी के रूप में पूजी जाती हैं।
यमराज और यमुना के इसी भाई-बहन के रिश्ते से रक्षाबंधन और भाई दूज, दोनों प्रमुख पर्वों की पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
रक्षाबंधन पर यमुना ने बांधा था यमराज को रक्षा सूत्र
पौराणिक मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन के दिन मां यमुना ने अपने भाई यमराज का तिलक कर उन्हें रक्षा सूत्र बांधा था। बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया।
मान्यता है कि इस दिन जो भाई-बहन मां यमुना में स्नान कर धर्मराज यमराज के समक्ष शीश नवाते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इसी मान्यता के चलते रक्षाबंधन पर यमराज और यमुना की कथा भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे की मंगलकामना के प्रतीक के रूप में याद की जाती है।
भाई दूज से भी जुड़ी है यमराज-यमुना की कथा
यमराज और यमुना का रिश्ता भाई दूज से भी जुड़ा माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। मान्यता है कि एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने भाई का तिलक कर उनका स्वागत और सत्कार किया। बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया।
इसी पौराणिक प्रसंग के कारण भाई दूज को यम द्वितीया कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
एक रिश्ता, दो पर्व और भाई-बहन के प्रेम की अनोखी कहानी
यमराज और यमुना की कथा में भाई-बहन के रिश्ते के दो अलग-अलग प्रतीक दिखाई देते हैं। एक ओर रक्षाबंधन पर बहन की कलाई से जुड़ा रक्षा सूत्र है, तो दूसरी ओर भाई दूज पर भाई के माथे का तिलक। दोनों पर्वों के केंद्र में यमराज और यमुना का अटूट भाई-बहन का रिश्ता है।
देश के अन्य हिस्सों में भी यमराज से जुड़े धार्मिक स्थल और पूजा की परंपराएं मिलती हैं। हिमाचल प्रदेश के भरमौर, मथुरा के विश्राम घाट और गया जैसे स्थानों पर यमराज की पूजा से संबंधित मान्यताएं प्रचलित हैं।
हालांकि, देवभूमि उत्तराखंड के डाकपत्थर स्थित मंदिर की अपनी अलग धार्मिक पहचान है। यहां एक ही स्थान पर धर्मराज यमराज, उनकी बहन मां यमुना और चित्रगुप्त की पूजा होती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन हो या भाई दूज यानी यम द्वितीया, डाकपत्थर का यह मंदिर यमराज और यमुना के पवित्र भाई-बहन के रिश्ते की अनोखी कहानी को जीवंत करता है।
यह कथा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यताओं को ही सामने नहीं लाती, बल्कि भारतीय परंपराओं में भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, सम्मान और एक-दूसरे की मंगलकामना के भाव को भी दर्शाती है।
Reported By: Praveen Bhardwaj











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